आज लाख बदनाम कर लो मुझे hindi kavita - New hindi english imp facts & best moral Quotes 2020

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      Poet- meko  abishek
       आज लाख  बदनाम  कर लो  मुझे,
 एक  दिन मैं खुद  से  खुद में  निखर  जाऊंगा ,
 बेर  रंजिश  के  पर्दे फैलाओगे  अगर  तो  मैं  अनुरक्ति  के  आईने  बनाऊंगा।
   परिचय ---==  कवि  इन  चंद पंक्तियों में अपने जीवन में घटित होने वाली उन विरल पीड़ा को  बयां करने की कोशिश करते हैं जो उनके मन को कहीं अंदर से काट रहा था यू कहें  तो  उनके  ह्रदय को चोटिल कर रहा था
 और इस  पीड़ा का मूल कारण उन्हें बिना किसी अर्थ के बदनामी की आग में झोंकना था , कवि अपने इन पंक्तियों में खुद को बदनामी के अंधकार से निखर लाने की बात कहते हैं हैं।

 व्याख्या-  कवि कहते हैं आज लाख बदनाम कर लो मुझे मैं खुद से खुद में निखर जाऊंगा ---
--=============  इस पंक्ति से कल्पनात्मक रूप में व्यक्ति के व्यक्तित्व को देखते हुए कवि का आशय है कि आज लाख बदनाम कर लो मुझे चाहे बदनामी के शीर्ष पर भी पहुंचा दो मेरी जितनी भी बुराइयां कर लो भले आज हार जाऊंगा यह गिर जाऊंगा पर एक  दिन फिर से उठ कर खड़ा हो जाऊंगा खुद से ही मेहनत करके अपनी काबिलियत को निखार लूंगा और खिले हुए फूल की तरह निखर जाऊंगा ।
   दूसरी पंक्ति में वे कहते हैं कि बेर  रंजिश के  पर्दे से फैलाओगे अगर, तो  मैं  अनुरक्ति  के आईने बनाऊंगा
वे  इसका  आशय यह यह बतलाते हुए कहते हैं कि दुश्मनी, छल कपट से मेरे जीवन में औरों पर मेरे प्रति द्वेष फैलाओ गे  मुझे कोई फिक्र नहीं होगी मैं  उनके प्रति भी प्रेम, स्नेह की नीति के अनुरूप एक ऐसा आईना बनाऊंगा जिन से शायद उनके  ह्रदय  में  भी मेरे प्रति  प्रेम, और  स्नेह की  भावना अंकुरित हो जाए।  ❤️


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