अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय। biography of Atal Bihari Vajpayee - New hindi english imp facts & best moral Quotes 2020

Breaking News

अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी l
biography of  Atal Bihari Vajpayee.

Picture  of atal bihari vajpayee

life history of atal bihari vajpayee
biography of mr atal bihari vajpayee


 अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्‍वालियर मध्य प्रदेश में हुआ था इस दिन को भारत में बड़ा दिन कहा जाता है।
वाजपेयी जी राजनीति में 1942 में अपने पाव रखा जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके भाई को 23 दिनों के लिए जेल भेजा गया था। भारतीय जनता पार्टी के गठन के उपरांत श्याम प्रकाश मुखर्जी जैसे नेताओं के साथ अटल बिहारी वाजपेयी की अहम भूमिका देखी गई है। 


personal life of atal bihari vajpayee
जब एक महान नेता की बात करें तो श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम मुख पर सदैव आता है, वाजपेयी जी ने अपने जीवन में सुख दुख की घड़ी में भारत को विकास के क्रम में बढ़ते देखा, बरसाती फुहारे देखी है, और उन्हें सूखते भी देखा है,, आखिर वाजपेयी जी ने क्या क्या नहीं देखा हैं ।
धैर्य और साहस के धनी व्यक्तित्व ने उन्हें फिर से हरी भरी होते देखा है, मर्यादा के सिंहासन पर विराजमान राजनीति को धराशायी होते देखा, जिन फूलों को मुरझाते देखा, डबडबायी आंखों से उन्हें खाद दिया, पानी दिया और फिर उन्हें हरा भरा कर दिया। पत्रकारिता को पारदर्शी और जनप्रिय बनाकर ठोस जनाधार का निर्माण किया।
श्री वाजपेयी जी ने क्या-क्या नहीं किया--- शत्रु को मित्र बनाया, वक्त्तृता को सर्वोच्च शिखर दिया। देश को धर्मनिरपेक्षता दी, भयभीतो को निर्भयता का पाठ पढ़ाया। लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी राह अपने आप चुनी। कट्टरपंथियों को उदारता का पाठ पढ़ाया। इस अज्ञात शत्रु ने देश के कण-कण को संघर्ष की जगह प्यार का पाठ पढ़ाया। साहित्य को प्राचीन प्रकोष्ठों मैं से निकाल कर आधुनिक मलिया चल की शुचि, शीतल, मंद समीर से परिचय कराया और अपने दर्द की अभिव्यक्ति भी उसी में की।

" मेरे प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना कि मैं गैरों को गले लगाना सकूं इतनी रुखाई कभी मत देना। " श्री अटल बिहारी वाजपेई।

political life of atal bihari vajpayee

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के तीन बार के प्रधानमंत्री थे। वे पहले 16 मई से 1 जून 1996 तक, तथा फिर 19मार्च 1998 से 22मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।वे हिन्दी कवि,पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे।

1942 और 1977 मैं जेल की दीवारें भी अपने मैं दबा कर इन्हें बदल ना सकी। इनकी कुशाग्र था और सत्यनिष्ठा के सामने वह भी बौनी पड़ गई। देश के प्रथम प्रधानमंत्री और अद्वितीय दार्शनिक प. जवाहरलाल नेहरू ने श्री वाजपेई जी के बारे में और उनकी शब्दों की जादूगरी के बारे में कहा था--

    " वाजपेयी  की जुबान में सरस्वती है

यह किसी दिन किसी ऊंचे पद को प्राप्त करेंगे"--- पंडित जवाहरलाल नेहरू


श्री वाजपेयी जी ने कृत्रिमता से दूर रहना देश को सिखाया , गाँधीवादी दर्शन जन - जन तक ये प्रेरित पहुंचाने में अद्वितीय सार गर्भित कार्य किया । उनके राजनैतिक लम्बे सफर में सहसा 1978 में एक ऐसा मोड़ आया जिससे वे कट्टरपंथी हिन्दुत्व से प्रखर गाँधीवादी , समाजवादी नेता के रूप में संक बन अवतरित हो गये । इस बौद्धिक परिवर्तन ने उन्हें साम्प्रदायिक से उदारवादी और नरमपंथी बना  दिया , उन्होंने लिखा था 

“ हो सकता है कि कल हम सभी फैशनबाज , गाँधीवादी हो जायें , गाँधी जी के आदर्शों के अपनाने के बजाय सिर्फ लफ्फाजी करने से ज्यादा बदतर और कुछ नहीं हो सकता ।"

 श्री वाजपेयी जी का मानना है कि आजाद भारत ने गाँधी जी से विश्वासघात किया । एक कविता में उन्होंने अपनी इस भावना को अभिव्यक्ति भी दी है । ' क्षमा याचना ' शीर्षक से इस कविता में उन्होंने लिखा है

क्षमा करो बापू तुम हमको ,
वचन भंग के हम अपराधी ।
राजघाट को किया अपावन ,
मंजिल भूले , यात्रा आधी ।


1924 में ईसाई , प्रभु ईसा का जन्मदिन मनाने में हर्ष और खुशियों में सराबोर हो रहे थे । यदि ये कहें कि पं ० कृष्ण बिहारी वाजपेयी के यहाँ दूसरे ईसामसीह का जन्म हो रहा था तो अतिशयोक्ति न होगी । कौन जानता था आज जन्म लिया बालक भारत जैसे महान देश का प्रधानमन्त्री होगा । पं ० कृष्ण बिहारी वाजपेयी स्कूल मास्टर थे और अटल जी के दादा पं ० श्यामलाल वाजपेयी जाने - माने संस्कृत के विद्वान् थे ।

अटल जी के नाम से लोकप्रिय श्री वाजपेयी की शिक्षा विक्टोरिया कॉलेज ग्वालियर में हुई और आज के लक्ष्मीबाई कॉलेज से उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। राजनीतिक शास्त्र में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे डीएवी कॉलेज कानपुर चले गए। इसके बाद कानून की शिक्षा प्राप्त करने के लिए अध्ययन प्रारंभ किया। नौकरी सेव कर लेने के बाद उनके पिता ने भी कानून केडी अपने बेटे के साथ प्रवेश लिया। पिता और पुत्र दोनों एक ही हॉस्टल की एक ही वर्ग में रहे थे। 

atal bihari vajpayee full biography in hindi
श्री वाजपेयी अपने प्रारम्भिक जीवन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क में आ गये थे स्या - क्या वह आर्य कुमार सभा के सक्रिय सदस्य रहे । 1942 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और तृता को 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान जेल भी गये । 1943 में आर . एस . एस . ने उन्हें प्रचारक बनाकर लड्डुओं के प्रसिद्ध नगर संडीला शहर भेज दिया । कुछ महीने बाद उनकी प्रतिभा के प्रभा मण्डल से प्रेरित होकर आर . एस . एस . ने लखनऊ से प्रकाशित ' राष्ट्र धर्म ' पत्रिका का सम्पादक नियुक्त कर दिया । फिर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपना मुख - पत्र ‘ पाञ्चजन्य ' प्रारम्भ किया और श्री वाजपेयी जी उसके प्रथम सम्पादक बनाये गये । कुछ वर्षों में ही श्री वाजपेयी जी ने पत्रकारिता में विशिष्ट ख्याति अर्जित करके विशिष्ट स्थान बना लिया । बाद के वर्षों में अटल बिहारी वाजपेई  जी ने  वाराणसी से प्रकाशित ' चेतना ' लखनऊ से प्रकाशित ' दैनिक स्वदेश ' और दिल्ली से प्रकाशित ' वीर अर्जुन ' का सफलता और कुशलता से सम्पादन किया ।



श्री वाजपेयी की क्षमता , बौद्धिक कुशलता और भाषण कला को देखते हुए श्यामाप्रसाद मुखर्जी और पं ० दीनदयाल उपाध्याय जैसे महान् नेताओं का ध्यान उनकी ओर गया । श्री वाजपेयी जन संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और बाद में यह श्यामाप्रसाद मुखर्जी के निजी सचिव इनकी द्वतीय बन गये । श्री वाजपेयी ने 1955 में पहली बार चुनाव मैदान में पैर रखा जब विजयलक्ष्मी पंडित गरी के द्वारा खाली की गई लखनऊ सीट के उपचुनाव में वह पराजित हो गये । आज वह इसी संसदीय क्षेत्र से जीतकर प्रधानमन्त्री पद तक पहुँचे हैं । वर्तमान कार्यकाल समेत श्री वाजपेयी आठ बार लोक सभा के लिये चुने गये हैं और दो बार राज्य सभा के सदस्य रहे हैं । श्री वाजपेयी ने 1974 में संसद से त्याग - पत्र देने की इच्छा व्यक्त करके सभी को चौंका दिया था तब उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण संसदीय लोकतंत्र की प्रभावहीन होती मर्यादा व सदन का सत्तारूढ़ दल के ' रबर स्टैम्प ' के रूप में बदल जाना बताया था ।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीतिक जीवन के प्रारम्भ में ही लखनऊ की सीट पर हार का मुंह देखकर न हिम्मत खोई और न साहस गंवाया अपितु चौगुने उत्साह से 1957 में बलरामपुर सीट से चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा में प्रवेश किया । इसी चुनाव क्षेत्र से 1962 में वापस की सुभद्रा जोशी से फिर हार गये लेकिन 1967 में उन्होंने फिर इस सीट पर कब्जा कर लिया । उन्होंने 1971 में ग्वालियर सीट पर 1977और 1980 में नई दिल्ली , 1 991,1 996,1 998 तथा 2004 में लखनऊ संसदीय सीट पर विजय प्राप्त की है । वे 1962 से 67 तक तथा 1986से 89 तक । ऊपरी सभा के सदस्य रहे ।

श्री वाजपेयी 1957 से 1977 तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता , 1968 से 1976 तक जन संघ के अध्यक्षा और 1977 के बाद जनता दल के विभाजन के बाद बनी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक थे । श्री वाजपेयी की सेवाओं से प्रभावित होकर भारत सरकार ने 1992 में इन्हें ' पद्म विभूषण ' से सम्मानित किया था । वर्ष 1993 में मानवाधिकार से जुड़ी बैठक के लिये जेनेवा जा रहे प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व श्री वाजपेयी जी ने किया।


इस दौरे को आशातीत सफलता मिली । इसीलिये कई राष्ट्रीय प्रतिनिधि मण्डलों के नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है । इस कार्य में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर श्री वाजपेयी जी को सर्वाधिक ख्याति प्राप्त है । 1994 में उन्हें श्रेष्ठ सांसद के तौर पर गोविन्द बल्लभ पंत और लोकमान्य तिलक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया । जनता पार्टी के संस्थापक के सदस्यों में भी श्री वाजपेयी शामिल थे और आपातकाल के बाद जनता पार्टी की आँधी चलने पर बनी मोरारजी देसाई सरकार में ये विदेश मन्त्री बनाये गये ।

विदेश मन्त्री के रूप में उन्होंने पड़ोसी देशों खास कर पाकिस्तान के साथ मधुर सम्बन्ध बनाने की पहल कर सबको चौंका दिया । संयुक्त राष्ट्र महासभा को हिन्दी में सम्बोधित कर श्री वाजपेयी ने एक तरह का इतिहास कायम किया और वहाँ आर्थिक मुद्दों , विकासशील एवं विकसित देशों के बीच संवाद , निरस्त्रीकरण पश्चिम एशिया और रंग - भेद की ओर सदस्य राष्ट्रों का ध्यान खींचा । आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ श्री वाजपेयी भी जेल गये ।

जब 1977 में आपातकाल समाप्त हो गया तो जनसंघ के जनता पार्टी में विलय के काम में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

Picture  of atal bihari vajpayee
Aatal bihari vajpayee full biography in hindi

श्री वाजपेयी ने अपने जीवन काल मेंअनेक पुस्तकें लिखी हैं जिनमें ये प्रमुख हैं। 

1.लोकसभा में भाषणों का संग्रह , 

2.लोकसभा में अटल जी ' ' मृत्यु या हल्या ' , 

3.' अमर बलिदान ' ,
4.' कैदी कविराय की कुण्डलियाँ ' ,
5. ' कविता संग्रह ' ,
6. ' न्यू डाइमेन्शन ऑफ इण्डियन फॉरेन पॉलिसी ' ,
7. ' फोर डिकेड्स इन पार्लियामेन्ट '



और शीघ्र ही प्रकाशित काव्य संग्रह ' मेरी इक्यावन रचनायें ' प्रमुख हैं । श्री वाजपेयी अनेक प्रमुख संसदीय समितियों के सदस्य रहे हैं । वह साठ के दशक में आश्वासन समिति और इसी दशक में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष रहे हैं ।  कुशाग्र बुद्धि एवं अद्वितीय प्रतिभा सम्पन्न श्री वाजपेयी 19 मार्च , 1998 को संसदीय लोकतन्त्र के सर्वोच्च पद पर प्रधानमन्त्री के रूप में दुबारा आसीन हुए । लगभग 22 महीने पहले भी वे इस पद को सुशोभित कर चुके हैं लेकिन संख्या बल के आगे त्याग - पत्र देना पड़ा था । विशाल जनादेश ने श्री वाजपेयी से स्थायी और सुदृढ़ सरकार देने का आग्रह किया और उन्होंने जनता के विश्वास को सफल सिद्ध कर दिया । सन् 2004 में भारतीय जनता पार्टी को गुजरात , मध्य प्रदेश , राजस्थान , छत्तीसगढ़ , उड़ीसा में विधानसभा चुनावों में भारी सफलता प्राप्त हुई । इससे प्रोत्साहित होकर इस पार्टी के महारथियों को ऐसा विश्वास हो गया कि इस समय पूरे देश का माहौल उनके पक्ष में है और इसी समय यदि लोकसभा के चुनाव भी करा दिये जायें तो भारतीय जनता पार्टी को पूरा बहुमत मिलने में कठिनाई नहीं होगी ।

इसी आशा से लोकसभा के चुनाव छ : माह पूर्व ही कराने का निर्णय ले लिया गया और मई 2004 में सारे देश में लोकसभा के चुनाव सम्पन्न हो गये । किन्तु बुनावों के परिणाम आशाओं के विपरीत निकले । जनता ने भाजपा को नकार दिया और राजग को सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं मिला । परिणामस्वरूप अटल जी प्रधानमन्त्री नहीं बन सके उन्होंने धैर्य और साहसपूर्वक विरोधी दल में बैठकर देश को रचनात्मक दिशा देने की घोषणा की ।       

Picture  of atal bihari vajpayee
biography on atal bihari vajpayee



अतः भारत को अटल राजनीति, समानता बंधुत्व रूपी राजनीति के शिखर पर पहुंचाने वाले श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी 93 वर्ष की आयु में 16 अगस्त 2018 की संध्या 5 बजे दिल्ली के एम्स अस्पताल में स्वर्ग सिधार गए।
16 अगस्त 2018, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,नई दिल्ली, दिल्ली।

जयन्ति ते सुकृतिनः जनसेवा परायणाः
! नास्ति येषां यश : काये जरा मरणजं भयम् ।।


श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन परिचय में  उनके  10 फैसलों ने इतिहास में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है।


1. निजीकरण को बढ़ावा तथा विनिवेश की शुरुआत करना- 1999 में अपनी सरकार में विनिवेश मंत्रालय के तौर पर एक अनोखा मंत्रालय का गठन किया था इसके मंत्री अरुण शौरी ने वाजपेई जी के नेतृत्व में भारत एल्युमिनियम कंपनी (बाल्को), हिंदुस्तान जिंक, इंडियन पेट्रोकेमिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड और विदेश संचार निगम लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी। वाजपेई से पहले देश में बीमा का क्षेत्र सरकारी कंपनियों के द्वारा ही चलाया जाता था लेकिन वाजपेई सरकार ने इसमें विदेशी निवेश के रास्ते खोल दिए तथा विदेशी निवेश की सीमा को 26 फ़ीसदी तक बढ़ा दिया जिसे 2015 में नरेंद्र मोदी सरकार ने बढ़ाकर 49 फ़ीसदी तक कर दिया।


2. द्वितीय चरणीय संचार क्रांति को बढ़ावा

भारत में संचार क्रांति के जनक भले ही राजीव गांधी को माना जाता है लेकिन उसे आम लोगों तक पहुंचाने के लिए वापी सरकार को अधिक याद किया जाता 1999 में वाजपेई ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) जो कि एक सरकारी कंपनी है उसके एकाधिकार को खत्म करते हुए नई टेलीकॉम नीति लागू की। इसके पीछे भी प्रमोद महाजन का दिमाग बताया गया। हालांकि नई टेलीकॉम नीति के तहत वह दुनिया सामने आई थी जिसका एक चित्र 2जी घोटाले के रूप में यूपीए कार्यकाल में सामने आया था।

3. सर्व शिक्षा अभियान

6 वर्ष की अवस्था से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का अभियान वाजपेयी के सरकार ने ही शुरू किया था। 2000-2001 मैं उन्होंने यह स्कीम लागू की जिसके चलते बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों की संख्या में कमी दर्ज की गई।

4. भारत को जोड़ने की योजना

वाजपेयी जी ने चेन्नई कोलकाता दिल्ली और मुंबई को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना लागू की साथ ही ग्रामीण अंचलों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लागू की उनके इस फैसले ने देश के आर्थिक विकास को रफ्तार दी। उनकी सरकार के दौरान है भारतीय स्तर पर नदियों को जोड़ने की योजना भी बना था। उन्होंने 2003 में सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया था। पर्यावरण कार्य कर्ताओं ने उनका काफी विरोध किया।

5. पोखरण का परीक्षण

मई 1998 मैं भारत के पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था यह 1974 के बाद भारत का पहला परमाणु परीक्षण था वाजपेई ने परीक्षण या दिखाने के लिए किया था कि भारत परमाणु संपन्न देश है हालांकि उसके आलोचक इस परीक्षण के जरूरत पर सवाल उठाते रहे थे क्योंकि पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण किया था प्रसिद्ध लेखिका अरुधंति राय ने 5 अगस्त 1998 में परमाणु प्रशिक्षण की आलोचना करते हुए
"द एंड ऑफ इमेजिनेशन" नाम से एक आर्टिकल लिखा।

6. पोटा कानून
प्रधानमंत्री के तौर पर यह वाजपेई के पूर्व कार्यकाल का दौर था जब 13 दिसंबर 2001 को 5 चरमपंथियों ने भारतीय संसद पर हमला कर दिया यह भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है हालांकि इस हमले में भारत के किसी नेता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था लेकिन पांचो चरमपंथियों और कई सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इन सब को देखते हुए आंतरिक सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी थी तथा वाजपेयी सरकार ने पोटा कानून बनाया यह बेहद सख्त आतंकवाद निरोधी कानून था जिसे 1995 के टाडा कानून के मुकाबले बेहद कठोर माना गया था, महेश 2 साल के अंदर इस कानून के तहत 800 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और करीब 4000 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया तमिलनाडु में एम डीएमके नेता को को भी गिरफ्तार किया गया था मैं 2 साल के दौरान वाजपेई सरकार ने 32 संगठनों परपोटा के तहत पाबंदी लगाई।

7. जातिवार जनगणना पर रोक

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के बनने से पहले एच डी देवगौड़ा सरकार ने जातिवार जनगणना करने को मंजूरी दे दी थी जिसके चलते 2001 में जातिगत जनगणना होनी थी। मंडल कमीशन के प्रावधानों को लागू करने के बाद देश में पहली बार जनगणना 2001 में होनी थी, ऐसे मंडल कमीशन के प्रावधानों को ठीक ढंग से लागू किया जा रहा है या नहीं इसे देखने के लिए जातिगत जनगणना कराए जाने की मांग जोर पकड़ रही थी। न्याय प्रणाली की ओर से बार-बार तथ्यात्मक आंकड़ों को जुटाने की बात कही जा रही थी ताकि ठोस कार्यप्रणाली बनाई जा सके तत्कालीन रजिस्टार जनरल ने जातिगत जनगणना की मंजूरी दे दी परंतु वाजपेई सरकार ने इस फैसले को पलट दिया जिसके चलते जातिवार जनगणना नहीं हो पाए।

8. राजधर्म का पालन
हर प्रधानमंत्री के फैसलों को खराब और अच्छे फैसलो
की कसौटी पर रखा जाता है जिसमें गुजरात में 2002 में हुए दंगे के दौरान 1 सप्ताह तक उनकी चुप्पी को लेकर वाजपेई की सबसे ज्यादा आलोचना हुई गोधरा कांड 26 फरवरी 2002 से शुरू हुआ था और तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेई का पहला बयान 3 मार्च 2002 को आया जब उन्होंने कहा कि गोधरा से अहमदाबाद तक जिस तरह से लोगों को जिंदा जलाया जा रहा है वह देश के माथे पर दाग है लेकिन उन्होंने इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया। करीब 1 महीने बात 4 अप्रैल 2002 को बाजपेई अहमदाबाद गए और वहां वाजपेई बोले भी तो इतना ही कहा कि मोदी को राजधर्म का पालन करना चाहिए।

9. संविधान समीक्षा आयोग का गठन-
वापी सरकार ने संविधान में संशोधन की जरूरत पर विचार करने के लिए फरवरी 2000 को संविधान समीक्षा के राष्ट्रीय आयोग का गठन किया था। 26 जनवरी 2250 में गणतंत्र दिवस के मौके पर अपने संबोधन मैं आर के नारायण के संविधान समीक्षा की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जब संशोधन की व्यवस्था है तो फिर संख्या क्यों होनी चाहिए लेकिन वाजपेई सरकार ने आयोग का गठन किया और उसे 6 महीने का वक्त दिया गया उस वक्त इस बात पर अंदेशा जताया गया था कि जिस संविधान को तैयार करने में 3 साल के करीब वक्त लगा उसकी समीक्षा महज 6 महीने में कैसे हो जाएगी।


10. लाहौर -आगरा समिट और कारगिल कंधार की नाकामी---
प्रधानमंत्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपई ने भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्तो को सुधारने की भरपूर कोशिश की उन्होंने 1999 में दिल्ली लाहौर बस सेवा शुरू की, पहली बस सेवा में खुद लाहौर गया और पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ मिलकर लाहौर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए यह कदम उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल में किया।

इसके बाद एक बड़ी नाकामी वाजपेई कंधार हाईजैक मसले के दौरान भी देखी जा सकती है 24 दिसंबर को पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन के लोगों ने आईसी 814 विमान को अपहरण कर लिया था। काठमांडू से दिल्ली आ रहे इस विमान में 176 यात्री और चालक दल के 15 लोग सवार थे तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह 3 चरमपंथियों को भारत से रिहा कर कंधार गए और यात्रियों को रिहा कराया यह कहा जाता रहा है कि वाजपेई सरकार ने आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी लेकिन कंधार संकट को नजदीक से देखने वाले और भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख ए एस दुल्लत ने कई बार इस बात को दोहराया है कि तब दिल्ली में सरकार के स्तर पर इस मामले को ठीक ढंग से हैंडल नहीं किया गया। 


 अटल बिहारी वाजपेयी जी के   जीवन के कुछ प्रमुख तथ्य
  •  आजीवन अविवाहित रहे।

  • अटल सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी। वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबन्धन सरकार को न केवल स्थायित्व दिया अपितु सफलता पूर्वक संचालित भी किया।

  • वे हिन्दी कवि भी थे ।

  • परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की संभावित नाराजगी से विचलित हुए बिना उन्होंने अग्नि-दो और परमाणु परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिये साहसी कदम भी उठाये।

  • सन् 1998 में राजस्थान के पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण किया जिसे अमेरिका की सी०आई०ए० को भनक तक नहीं लगने दी।

अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था। तथा हिंदी भाषा बोलने वालो को प्रोत्साहित किया। 


Munda government system hindi, english notes मुण्डा शासन व्यवस्था हिंदी नोट्स click here

No comments

If you any doubts, please let me know.

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();

Pages