Munda government system hindi, english notes मुण्डा शासन व्यवस्था हिंदी नोट्स - New hindi english imp facts & best moral Quotes 2020

Breaking News

   💥  Munda government system hindi notes  मुण्डा शासन व्यवस्था हिंदी नोट्स 💥➡️

      प्रस्तावना- 

     झारखंड में आकर निवास करने वाले सबसे पुरानी जनजाति में  मुंडा जनजाति प्राचीन है. "सोना लेकन दिसुम  " अर्थात सुनहरे देश की खोज में रिसा मुंडा लगभग 22000 मुंडा ओं के साथ झारखंड की सीमा में दस्तक देकर झारखंड में ही रच बस गए। क्षेत्र में नागों की काफी अधिक प्रमुखता थी इस कारण से इसे "नाग दिसुम " अर्थात नाग देश या नागों का देश कीवी संज्ञा दी गई है। यहां के मुंडा ने जंगलों को साफ करके खुंटकट्टीदार गाँव बसाए। यह ग्रामीण अपने गांव के मालिक या राजनीतिक प्रमुख व्यक्ति या विशिष्ट व्यक्ति को "खुंटकट्टीदार" कहते थे।
           झारखंड जनजाति बहुल प्रदेश है। यहां लगभग 32 जन जातियां पाई जाती है। अतः इन सभी जनजातियों की अपनी -अपनी सामाजिक अर्थ व सांस्कृतिक विशेषताएं एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं हैं। ये व्यवस्थाएं अतीत से वर्तमान पर चली आ रही है। इनका महत्व आज भी देखने को मिलता है जिसमें मुंडा शासन व्यवस्था का स्थान भी सर्वो प्रमुख है।
   
        💥➡️  मुण्डा झारखण्ड(छोटानागपुर, कुकरा,खोखरा, पशु भूमि)की तीसरी सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति है ।संपूर्ण भारत में इनकी जनसंख्या 2,228,661 है। तथा झारखण्ड में इनकी वर्त्तमान आबादी लगभग 1,229,221 है।मुण्डा शब्द का सामान्य अर्थ विशिष्ट व्यक्ति गाँव का प्रमुख  व्यक्ति तथा विशिष्ट अर्थ गाँव का राजनीतिक प्रमुख होता है । यह जनजाति कोलेरियन समूह से संबंध रखते  है । इनके निवास स्थान के संबंध में विद्वानों में आपसी मतभेद है । कुछ विद्वानों ने इनका मूल स्थान  तिब्बत  के पक्ष में अपना मत रखा।  , जबकि कुछ विद्वानों के अनुसार आर्यों के दबाव के कारण ये दक्षिण - पश्चिम से मध्य प्रदेश होते हुए झारखण्ड में आकर बसे हैं । वहीं एक अन्य विचार है कि यह जनजाति दक्षिण - पूर्व से होकर झारखण्ड में आयी तथा असुरों को पराजित कर अपनी शासन व्यवस्था स्थापित की । मुण्डा स्वयं को होड़ोको तथा अपनी भाषा को होड़ो जगर कहते हैं । मुण्डा जनजाति का संबंध प्रोटो - आस्ट्रेलायड प्रजाति समूह से है ।यह जनजाति मुख्यता  केवल झारखण्ड में ही पायी जाती है ।परन्तु वर्तमान में अच्छी जीविका एवं अपने प्रगति के विस्तार में ये भारत के अन्य  क्षेत्रों में भी निवास करने लगे हैं। झारखण्ड में मुण्डा जनजाति का सर्वाधिक संक्रंदण राँची जिला में है ।
               
       
       ➡️ इसके अतिरिक्त यह (1.)जनजाति गुमला ,(2) सिमडेगा ,( 3)प ० सिंहभूम तथा (4)सरायकेला - खरसावां में भी निवास करती है ।  वर्तमान समय में संचार साधनों के विकास के कारण यह जनजाति झारखण्ड से संलग्न राज्यों में भी कमोबेश संख्या में निवास करती हैं । मुंडा ओं की अपनी पारंपरिक शासन व्यवस्था है इनकी पारंपरिक व्यवस्था पड़ा पंचायत व्यवस्था ही मुख्य तौर पर रही है। मुंडा जनजाति के लोग गणतंत्र के सदेव पोषक एवं पालनहार रहे हैं। इनके ग्राम पंचायत को पड़हा पंचायत कहा जाता था। इस पंचायत में पंच होते थे जिनमें गांव के अनुभवी लोग रहते थे पंचों के निर्णय पर आया सभी प्रकार के मामलों में मान्य होते हैं इसी पड़हा  पंचायत के द्वारा मुंडा गाँव संचालित और नियमित होते हैं। लगभग 5 से 20 गांव को मिलाकर पड़ा पंचायत बनाई जाती है। इसमें गांव की संख्या इससे अधिक भी जा सकती है। 
             ➡️मुण्डाओं द्वारा निर्मित भूमि को ' खुंटकट्टी भूमि ' कहा जाता है । इनकी प्रशासनिक व्यवस्था में खुंट का आशय परिवार से है इस जनजाति का अस्तित्व केवल झारखण्ड में है । सामाजिक स्तरीकरण की दृष्टि से मुण्डा  मानकी , मुण्डा, समाज ठाकुर ,बाबू  भंडारी एवं पातर में विभक्त है। 
   * मुण्डा शासन व्यवस्था को बेहतर ढंग से चलाने एवं नियंत्रित करने के लिए इस व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण पदों , संगठनों एवं संबंधित तथ्यों का विवरण निम्नलिखित है :
➡️ महत्वपूर्ण पद / 
(1)मुण्डा 
 मुण्डा गाँव का प्रधान होता है । यह पद वंशानुगत होता है । इसका प्रमुख कार्य ग्रामीणों से लगान वसूलना , गाँव को विधि व्यवस्था बनाये रखना तथा गांवों के विवादों का निपटारा करना तथा आपसी सामंजस्य स्थापित करना होता है ।
(2)परहा / पड़हा ➡️
.यह  कई गांवों (लगभग 5 से 20 )से मिलकर बनी पंचायत ( अतग्रामीण पंचायत ) को परहा / पड़हा कहा जाता है । पड़हा पंचायत का प्रमुख कार्य दो या अधिक गाँवों के बीच विवादों का निपटारा करना है । यह मुण्डा जनजाति की शासन व्यवस्था के सर्वोच्च पर अवस्थित है । इसे मुण्डा जनजाति की सर्वोच्च कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा विधायिका की संज्ञा दी जा सकती है । पहड़ा के प्रमुख अधिकारी कुंवर, लाल तथा कार्तो होते थे ।
 * परंपरागत मुण्डा प्रशासन में महिलाओं को को स्थान प्रदान नहीं किया जाता था ।उन्हें इनसे अलग रखा गया  था। 
 पहड़ा पंचायत स्थल को अखड़ा कहा जाता है । यह गाँव का सांस्कृतिक केन्द्र भी होता है । . अखड़ा मानकी बहाना पाहन परहा पंचायत के प्रधान को मानकी कहा जाता है तथा यह पद वंशानुगत होता है । 
(3)➡️️हातु मुण्डा
 यह ग्राम पंचायत का प्रधान होता है । मुण्डा ग्राम पंचायत को हातू कहा जाता है ।
➡(️4)️पाहन 
मुण्डा गाँव का धार्मिक प्रधान पाहन कहलाता है । पाहन गाँव में शांति बनाये रखने हेतु पूजा - पाठ तथा बलि चढ़ाने का कार्य करता है । इन कार्यों के संचालन हेत पाहन को लगान मक्त भमि प्रदान की जाती हैं जिसे डाली -कटारी भूमि कहा जाता हैं। 
(5)भूत - खेता * 
➡️  गाँव को भूत - प्रेत के प्रकोप से बचाने हेतु पाहन द्वारा विशेष पूजा की जाती है । इस हेतु पाहन को अतिरिक्त भूमि प्रदान की जाती है जिसे भूत खेता कहा जाता है । इसकी उपज या आय से भूत - प्रेत की पूजा व्यवस्था का संचालन किया जाता है । 
(6)️पुजार / पनभरा➡
️पाहन का सहायक पुजार / पनभरा कहलाता है ।
(7)➡️पहड़ा राजा  यह पहड़ा पंचायत का सर्वोच्च अधिकारी होता है।  
️ इस जनजाति की शासन व्यवस्था में दीवान , ठाकुर , कोतवार , पांडे , कर्ता तथा लाल आदि नामक अधिकारी होते हैं , जो पहड़ा राजा को शासन संचालन में सहयोग प्रदान करते हैं । 

(8)मानकी ➡️परहा पंचायत के प्रधान को मानकी कहा जाता है तथा यह पद वंशानुगत होता है ।

. (9)अखड़ा➡️
 पहड़ा पंचायत स्थल को अखड़ा कहा जाता है । यह गाँव का सांस्कृतिक केन्द्र भी होता है जहाँ लोग धार्मिक कार्यक्रमों व त्योहारों के अवसर पर इकट्ठा होकर सामूहिक गान व सामूहिक नृत्य करते थे। 

➡️इन्हे भी देखें --

💥झारखण्ड के प्रमुख 15 मेले,  15 famous fairs of jharkhand  notes [importent facts](hindi +eng)

💥 Munda government system hindi notes Munda government system Hindi notes 💥➡️

Preface-


The Munda tribe is the oldest among the oldest tribes that have come to Jharkhand. In search of "gold but disum" meaning golden country, Risa Munda settled in Jharkhand with around 22000 Mundas on the border of Jharkhand. The serpent was very prominent in the region and for this reason it has been called "Nag Disum" i.e. Nag country or Nag country. The Mundas here cleaned the forests and established Khuntkattidar villages. These villagers used to call their village owner or political leader or specific person "Khuntkattidar".

Jharkhand is a tribal dominated state. About 32 tribes are found here. Therefore, all these tribes have their own social meaning and cultural characteristics and administrative systems. These systems are going on from the past to the present. Their importance is seen even today, in which the place of Munda governance is also paramount.

💥➡️ Munda is the third most populous tribe of Jharkhand (Chhotanagpur, Kukra, Khokhara, cattle land). It has a population of 2,228,661 in the whole of India. And their current population in Jharkhand is about 1,229,221. The common meaning of the word Munda is specific person is village head and specific meaning is village political head. This tribe belongs to the Kolarian group. There is a difference of opinion among scholars regarding their place of residence. Some scholars took their place of origin in favor of Tibet. , While according to some scholars, due to the pressure of the Aryans, they have settled in Jharkhand from south-west through Madhya Pradesh. At the same time, another idea is that this tribe came to Jharkhand from the southeast and defeated the Asuras and established their own system of governance. Munda calls himself Hodoka and his language is Hodo Jagar. The Munda tribe belongs to the Proto-Australoid species group. This tribe is predominantly found only in Jharkhand. But at present, they have started living in other areas of India in good livelihood and expansion of their progress. Ranchi is the highest concentration of Munda tribe in Jharkhand.

Apart from this, this tribe also lives in (1) Gumla, (2) Simdega, (3) West Singhbhum and (4) Saraikela - Kharsawan. At present, due to the development of means of communication, these tribes also live more or less in the states attached to Jharkhand. Mundas have their own traditional governance system, their traditional system was mainly Panchayat system. The people of Munda tribe have always been nutritious and rearing of the Republic. His gram panchayat was called Pariha Panchayat. This panchayat used to have panches in which experienced people of the village used to live. The decision of the panches is valid in all kinds of cases. Munda villages are operated and regularized through this panha panchayat. About 5 to 20 villages comprise a panchayat formed. The number of villages in it can go more than this.

The land created by the Amundas is called 'Khuntkatti Bhoomi'. In their administrative system, Khunt means family, this tribe only exists in Jharkhand. In terms of social stratification, Munda is divided into Manki, Munda, Samaj Thakur, Babu Bhandari and Patar.

* Following are the details of important posts, organizations and related facts related to this system to run and control Munda governance system better:

➡️ Important Posts /

(1) Munda

Munda is the head of the village. This position is hereditary. Its main task is to collect the revenue from the villagers, maintain the law and order of the villages and settle the disputes in the villages and establish mutual harmony.

(2) Paraha / Perha

.The Panchayat (Atgramin Panchayat) consisting of several villages (about 5 to 20) is called Paraha / Pariha. The main function of the Pariha Panchayat is to settle disputes between two or more villages. It is situated at the highest point of governance of Munda tribe. It can be termed as the highest executive, judiciary and legislature of the Munda tribe. The chief officers of Pahada were Kunwar, Lal and Karto.

* Women were not given a place in traditional Munda administration. They were kept separate from them.

The Pahada Panchayat site is called Akhada. It is also the cultural center of the village. . The head of the Akhara Manki Masquerade Pahan Paraha Panchayat is called Manki and this post is hereditary.

(3) hatu Munda

It is the head of the Gram Panchayat. Munda Gram Panchayat is called Hatu.



The religious head of Munda village is called Pahan. Pahan performs puja and sacrifices to maintain peace in the village. To conduct these works, Pahan is provided with Lagaan bhakti land called Dali-Katari Bhumi.

(5) Ghost - Kheta *

 To save the village from the wrath of ghosts, special worship is done by Pahan. For this Pahaan is provided with additional land which is called Bhoot Kheta. From its produce or income, the system of worship of ghosts is conducted.

(6) Pujara / Panbhara

The assistant of Pahaan is called Pujar / Panbhara.

(7) The first king is the highest official of the Pahada Panchayat.

 The administration of this tribe consists of officers named Diwan, Thakur, Kotwar, Pandey, Karta and Lal etc., who provide support to the Pahada king in governance.


(8) The head of Mankiya Paraha Panchayat is called Manki and this post is hereditary.


. (9) Akhada

The Pahada Panchayat site is called Akhada. It is also the cultural center of the village where people used to gather and perform group songs and group dances on the occasion of religious programs and festivals.

See also -

AjorMajor 34 festivals of Jharkhand, notes [Major 34 festival festivals of Jharkhand]

15 major fairs of jharkhand, 15 famous fairs of jharkhand notes [importent facts] (hindi + eng)

No comments

If you any doubts, please let me know.

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();

Pages